सुषमा स्वराज ने मात्र 25 साल की उम्र में चौधरी देवीलाल के हरियाणा सरकार में मंत्री बनने से लेकर भारत की विदेश मंत्री बनने तक कई राजनीतिक किले फतह किए। संसद और संसद के बाहर उनके भाषण हमेशा लोगों को आकर्षित करते थे। हाजिरजवाबी में भी उनका कोई मुकाबला नहीं था।कुछ लोग तो उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी के बाद भारतीय जनता पार्टी की सबसे बेहतरीन वक्ता मानते थे तो कई उन्हें इंदिरा गांधी के बाद देश की सबसे सफल महिला राजनेता मानते थे। लेकिन इन सब उपलब्धियों के बावजूद उनका राजनीतिक करियर विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से अछूता नहीं रहा।

क्रिकेट की दुनिया में इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत करने वाले ललित मोदी पर वित्तीय अनियमितता के आरोप थे और भारत का प्रवर्तन निदेशालय उनकी जांच कर रहा था। इस बीच खबर आई कि विदेश मंत्रालय ने ललित मोदी को पुर्तगाल जाने की इजाजत दी है।

जाहिर है विदेश मंत्री होने के नाते इसका सीधा आरोप सुषमा स्वराज पर लगा। विदेश मंत्रालय ने सफाई दी कि ऐसा ‘मानवीय आधार’ पर किया गया क्योंकि वो बीमार थे। मगर मीडिया का एक हिस्सा और विपक्षी कांग्रेस पार्टी इस दलील को मानने के लिए तैयार नहीं थे। कांग्रेस ने उनके इस्तीफे तक की मांग कर डाली थी। लेकिन पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके साथ खड़े रहे और इसी वजह से उन्हें ज्यादा मुश्किल नहीं हुई।

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